Prayer
सरस्वती वन्दना
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे।
जग सिरमौर बनाये भारत,
वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे।।
हे हंसवाहिनी ज्ञानवाहिनी,
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे।
साहस शील हृदय में भर दे,
जीवन त्यागर-तपोमय कर दे,
संयम सत्य स्नेह का वर दे,
स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे।
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी,
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे।
लव कुश, धु्रव प्रहलाद बने हम,
मानवता का त्रास हरे हम,
सीता, सावित्री, दुर्गा माँ,
फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दें।
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी,
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे।।
हमारी वन्दना
या कुन्देन्दुतुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ।
सा मा पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाङ्यापहा।।
शुक्लां ब्रह्मविचार-सार-परमांमाद्यां जगद्व्यापिनीं।
वीणा-पुस्तक-धारिणी अभयदां जाङ्यान्धकारापहाम्।।
हस्ते स्फाटिकमालिकां विद्धतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरी भगवती बुद्धिप्रदां शारदाम् ।।